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सावधान! आंखों की ये समस्याएं बन रही हैं मौत की वजह, समय रहते करें बचाव

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अक्सर लोग आंखों में दर्द, जलन, खुजली और पानी बहने जैसी समस्याओं को नजर अंदाज कर देते हैं क्योंकि वे इन्हे सामान्य मानते हैं.. अगर आप भी ऐसा ही करते हैं तो सावधान हो जाइए .. दरअसल आपके इस रवैए के कारण कई बार आंखें गंभीर दिक्कतें दे जाती हैं और जिन समस्याओं को आप छोटी मानते हैं आगे जाकर उन्ही से आंखों की रोशनी खोने के साथ जान जाने का भी खतरा हो सकता है। असल में हाल ही में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस बात का खुलासा किया है कि देश में आंखों के कैंसर से मरने वालो का संख्या में तेजी से वृद्धी हुई है जिसका कारण ये है कि यहां आखों के कैसंर का पता तब चलता है, जब बहुत देर हो चुकी होती है।

दरअसल चार फरवरी को विश्व कैंसर दिवस है ऐसे में कैंसर के बारे में किए गए हालिया सर्वे से ये खुलासा हुआ है कि भारत में आंखो के कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस विषय में लोगों को जागरूक कर रहे हैं ताकि समय रहते हैं इसकी पहचान की जा सके और उसका उचित इलाज किया जा सके।

देश के प्रसिद्ध नेत्र कैंसर विशेषज्ञ बिक्रमजीत पाल का कहना है कि, “सभी लोगों को ये अच्छी तरह मालूम होना जाहिए कि शरीर के दूसरे अंगों की तरह आंखों में भी कैंसर हो सकता है.. साथ ही अगर दूसर अंगों के कैंसर का आंखों पर भी प्रभाव पड़ सकता है’। विशेषज्ञ पाल का कहना है कि, “पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में रेटिनोब्लास्टोमा यानी रेटिना का कैंसर सामान्य है जिसमें भेंगापन और आंखों की पुतली के भीतर सफेद दाग को देखने को मिलता है।”

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साथ ही उन्होंने ये भी बताया कि अगर प्ररम्भिक चरण में ही इस रोग का पता चल जाए तो बच्चे की जान और उसकी दोनों आंखों की रोशनी समय रहते बचाई जा सकती है, पर वहीं अधिक देर होने से आंखों की रोशनी जाने के साथ-साथ जान जाने का खतरा पैदा हो जाता है।

 

हाल ही में हुए एक स्वास्थ्य सर्वे के अनुसार देश में हर वर्ष करीब दस हजार आंखों के कैंसर के मामले संज्ञान में आ रहे हैं जिसमें 70 से 80 फीसदी युवा और लगभग 20 से 30 प्रतिशत बच्चे इसका शिकार बन रहे हैं। इसके साथ ही आंखों का कैंसर नवजात बच्चे को भी हो सकता है। ऐसे में इसकी रोकथाम जागरुकता और इससे लड़ने की प्रतिबद्धता से ही की जा सकती है।

वहीं आंखों के कैंसर के लक्षण की बात करें तो जिन लोगों को ये समस्या होती है उनकी आंखों के बीच में सफेद रोशनी जैसी दिखाई पड़ती है। इसके अलावा कभी-कभी आंखो के भेंगेपन के मामलों में भी कैंसर का खतरा उत्पन्न हो जाता है। ऐसे किसी भी लक्षण के दिखते ही पीड़ित व्यक्ति को उपचार के लिए नेत्र रोग के पास जाना चाहिए। अगर आंखों के कैंसर के उपचार की बात करें तो इसमें शल्य चिकित्सा, विकिरण चिकित्सा या लेजर तकनीक शामिल हैं। नई तकनीक के जरीए आंखों की पलकों और आंखों के भीतरी भाग में होने वाले कैंसर को भी नियंत्रित किया जा सकता है।

 

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